स्वतंत्रता दिवस

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बच्चो, स्वतंत्रता दिवस का दिन भला कोई कैसे भूल सकता है! यह दिन हर भारतीय के लिए एक नया सवेरा, नया सूरज और नई किरणें लेकर आया था। इसी दिन भारत अंग्रेजों की गुलामी और अत्याचारों से आजाद हुआ था। आजाद होने के बाद ही भारतीयों को यह एहसास हुआ था कि आजादी का सुख क्या होता है! आजादी, यानी कि अपनी मरजी से बोलने का हक, कार्य करने का हक और खाने-पीने का हक। अंग्रेजों के राज में ऐसा नहीं था। वे भारतीयों से मजदूरों की तरह काम कराते थे और उन्हें बुरी तरह पीटते थे, भूखा रखते थे और अनायास ही मौत की नींद सुला देते थे। अंग्रेजों के अत्याचारों से त्रस्त अनेक क्रांतिकारियों ने उनका मुकाबला किया। झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई से लेकर कैप्टन लक्ष्मी सहगल तक ने अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल बजाया। तात्या टोपे, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुखदेव, महात्मा गांधी, सुभाषचंद्र बोस, लाला लाजपत राय, सरदार वल्लभ भाई पटेल, दुर्गा भाभी, गणेशशंकर विद्यार्थी आदि अनेक क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों का मिलकर मुकाबला किया। अंग्रेजों के साथ इस संघर्ष में अनेक शहीदों को अपने प्राणों का बलिदान देना पड़ा। उनके खून से पूरी धरती रँग गई और चिल्लाकर हर व्यक्ति को यह कहती रही कि गुलामी का जीवन, जीवन नहीं, मौत के बराबर है। इसलिए आजादी के लिए लड़ो, आजादी के लिए मरो और आजादी के ही सपने बुनो। वीरों की ललकार ने सभी भारतीयों को एक कर दिया और जन-जन एकता के सूत्र में बँधकर अपनी भारत माँ को आजाद कराने के लिए चल पड़ा। देश को स्वतंत्रता मिलने के बाद जंजीरों में जकड़ी भारत माता के चेहरे पर मुसकराहट आई और देश में नया संविधान व कानून बना। अंग्रेजों के राज में भारत बेहद पिछड़ा हुआ था। अंग्रेजों ने भारत के व्यक्तियों और वस्तुओं का मनचाहे तरीके से उपयोग किया। स्वतंत्रता के बाद भारतीय नेताओं ने भारत की प्रगति के लिए नई-नई योजनाएँ और पंचवर्षीय योजनाएँ बनाईं। लोगों को शिक्षित करने के लिए जगह-जगह पर पाठशालाओं और कॉलेजों का निर्माण किया गया। देश ने एक नई अँगड़ाई ली। स्वतंत्र भारत में उत्पन्न हुए बच्चों की खिलखिलाहटों और मासूमियत से देश रँग गया और देश में होती प्रगति का उजाला पूरे विश्व में फैलता गया। समय अपनी गति से बढ़ता रहा और देश अपनी प्रगति करता रहा।

15 अगस्त के दिन भारतीय अपनी खुशी का इजहार पतंगें उड़ाकर करते हैं। आसमान में उड़ती रंग-बिरंगी आजाद पतंगें हर व्यक्ति को यह संदेश देती हैं कि जीवन में आजादी का महत्त्व समझें; पर हाँ, इसका दुरुपयोग कभी न करें। इसके साथ नियमों और आदर्शों की एक ऐसी डोर बाँधकर रखें, जो आपको आकाश की ऊँचाइयों तक तो पहुँचाए, लेकिन गिरने से बचाए।