संपादकीय

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प्यारे बच्चो, ‘पंख’ पत्रिका कैसी लग रही है आपको। आपके प्यार में कब हम छमाही में प्रवेश कर गए, पता ही नहीं चला। हाँ बच्चो, ‘पंख’ पत्रिका को छह माह पूरे हो गए हैं। इन छह महीनों में हम आपके गहरे दोस्त बन गए हैं। पत्रिका इंद्रधनुषी रंगों से सराबोर हो गई है। इसमें हैं न आपकी पसंद के सभी रंग।

हर महीने की कुछ विशेष बात होती है। महान् लोगों को याद किया जाता है, उनकी महानता का जिक्र ‘पंख’ में किया जाता है। अब तो नए-नए रंग और उमंग ‘पंख’ में लग गए हैं, जिन्होंने इसकी उड़ान को बहुत ऊँचा कर दिया है। इस बार भी ‘पंख’ की उड़ान को फुरती दी है इसके नए-नए लेखों और स्तंभों ने।

अगस्त का मौसम अपने साथ त्योहारों को लेकर आता है। सावन में तीज, बिखेरती है खुशियों और त्योहारों के बीज। स्वतंत्रता दिवस, रक्षा बंधन, जन्माष्टमी…बारिश के साथ ही त्योहारों की भी झड़ी लग जाती है सावन में।

साँप की बहुत सारी बातें, शरीर के लिए क्यों जरूरी है खनिज, स्वतंत्रता दिवस के बारे में आप पढ़ेंगे इस अंक में। इन लेखों को पढ़कर आपको रोचक जानकारी मिलेगी। बारिश हो और छतरी का जिक्र न हो, यह भला कैसे हो सकता है! छतरी कैसे हम तक पहुँची, यह रोचक बात भी आप जानेंगे इस बार। शहरों में इस बार हम आपके लिए सँजोकर लाए हैं चंडीगढ़ को। एक ऐसे शहर को, जो दो-दो राज्यों की राजधानी बनकर सिरमौर बना हुआ है। आप यह भी जानेंगे कि जीव-जंतुओं की कौन सी अनोखी आदतें होती हैं। साथ ही इस बार आप भारत छोड़ो आंदोलन और राष्ट्रीय खेल दिवस के बारे में भी पढ़ेंगे।

हिंदी हमारे देश की ऐसी भाषा है, जो भारत में सबसे ज्यादा बोली और समझी जाती है। हम आपको हिंदी से संबंधित नई-नई जानकारियाँ देते हैं, ताकि आपकी भाषा का विस्तार हो। इसी शृंखला में इस बार हम वाक्य के लिए एक शब्द खोजकर लाए हैं सिर्फ आप जैसे होनहार बच्चों के लिए।

इन सबके अलावा, अपने नियमित स्तंभ तो आप ‘पंख’ में पाएँगे ही। तो बच्चो, देर किस बात की है? ‘पंख’ आपके हाथों में है। आप अपने हाथ से ‘पंख’ में नए रंग भरिए और हाँ हमें यह बताना मत भूलिएगा कि आपको और क्या-क्या पढ़ना पसंद है। हमें आपके पत्रों का इंतजार रहेगा।

आप अपने सुझाव इ-मेल jepcranchi1@gmail.com पर भेज सकते हैं।

 

ए. मुथु कुमार (भा.प्र.से.)

राज्य परियोजना निदेशक, झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद्