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जब मुझे यह ज्ञात हुआ कि झारखंड के बच्चों के मनोरंजन एवं ज्ञानवर्द्धन के लिए ‘पंख’ पत्रिका का प्रकाशन किया जा रहा है तो बेहद प्रसन्नता हुई। किसी भी राष्ट्र के निर्माण में बच्चे प्रमुख भूमिका निभाते हैं। बच्चे और युवा देश का भविष्य हैं। बच्चों को बचपन से अच्छा परिवेश और पुस्तकों का साथ मिलना बहुत जरूरी है। शिक्षा और पुस्तकें बच्चों के नवनिर्माण एवं चरित्र को सँवारने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

आधुनिक समय में बच्चों के लिए खेल और पढ़ाई के मापदंड पहले के मुकाबले बहुत बदल गए हैं। पहले दादा-दादी एवं नाना-नानी बच्चों को सांस्कृतिक कहानियाँ सुनाया करते थे और तरह-तरह की जानकारियाँ प्रदान करते थे। अब अधिकतर परिवारों में व्यस्तता के कारण दादा-दादी और नाना-नानी का साथ कम देखने को मिलता है। ऐसे में ‘पंख’ पत्रिका दादा-दादी और नाना-नानी की कमी पूरी करने में सहायक सिद्ध होगी।

‘पंख’ पत्रिका में कहानियाँ, कार्टून कोना, पहेलियाँ, ज्ञानवर्द्धक जानकारियाँ, कविताएँ सभी कुछ है। यह पत्रिका एक तरह से गागर में सागर भरने का काम कर रही है। इस पत्रिका में देश के साथ-साथ झारखंड की सांस्कृतिक विरासत और प्रतिभाओं के बारे में बताया जाता है। इससे बच्चों को प्रेरणा मिलती है और उनकी शारीरिक एवं मानसिक नींव मजबूत होती है। हर बच्चे को ऐसी पत्रिका पढ़नी चाहिए। ऐसी पत्रिका पढ़ने से वे देश, राज्य एवं समाज से अवगत होंगे और उनके मन में देश-प्रेम की भावना की किसलय पल्लवित होंगी, जिससे देश प्रगति की ओर बढ़ेगा और एक नव इतिहास रचेगा।

कृपानंद झा (भा.प्र.से.)

निदेशक, प्राथमिक शिक्षा विभाग, झारखंड