विद्यार्थियों में एकाग्रता का महत्त्व

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बच्चो, जब तुम खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर, सानिया मिर्जा, साइना नेहवाल, आई.ए.एस. टॉपर नंदिता के.आर. और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देखते हो तो स्वयं को ऊर्जावान् और आत्मविश्वास से भरा महसूस करते हो न और मन करता है कि तुम भी उनके जैसे कामयाब बन जाओ। कोई भी कार्य या लक्ष्य मुश्किल नहीं होता। हर कार्य, चाहे वह जितना भी कठिन हो, उसे एकाग्रता से सरल बनाया जा सकता है। कोलंबस नई दुनिया की खोज इसलिए कर पाया, क्योंकि उसने दो दशक से भी अधिक समय तक अपनी एकाग्रता को ‘समुद्री अभियान’ पर केंद्रित कर लिया था। दिव्यांग होते हुए भी एवरेस्ट विजेता अरुणिमा सिन्हा, प्रशासनिक अधिकारी इरा सिंघल, ऑस्ट्रेलिया के हाथ-पैरों से रहित मोटीवेशनल स्पीकर निक वुजिसिक पूरी दुनिया को अपनी कामयाबी से इसलिए चकित कर पाए, क्योंकि इन्होंने एकाग्रता से अपने लक्ष्य को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया था। विद्यार्थी जीवन से ही एकाग्रता की आदत अपना लेनी चाहिए। एकाग्रता भी एक आदत है और यह एक ऐसी आदत है, जो व्यक्ति को पूरी उम्र सुख और कामयाबी देती है। पौराणिक काल से ही एकाग्रता के महत्त्व पर बल दिया जाता रहा है। जब कौरव और पांडव गुरुकुल में पढ़ते थे तो उनके गुरु भी उन्हें एकाग्रता का पाठ पढ़ाते थे। आपको वह कहानी याद है न, जब एक दिन गुरु द्रोण ने पेड़ पर लकड़ी की चिडि़या रखकर सभी शिष्यों से उसपर निशाना साधने के लिए कहा था। निशाना लगाने से पहले उन्होंने सबसे पूछा था कि तुम्हें पेड़ पर क्या दिखाई देता है? अनेक शिष्यों ने कहा कि उन्हें पेड़, पत्तियाँ, चिडि़याँ आदि दिखाई देते हैं। अंत में उन्होंने अर्जुन से पूछा, ‘‘तुम्हें क्या दिखाई देता है?’’ अर्जुन बोले, ‘‘गुरुजी, मुझे तो केवल चिडि़या की आँख दिखाई देती है।’’ आँख पर एकाग्रता केंद्रित करने के कारण अर्जुन ने उसपर सही निशाना लगाया और यही कारण था कि वे महान् धनुर्धर बन पाए। स्वामी विवेकानंद बेहद एकाग्र थे। उनकी एकाग्रता इतनी चमत्कारिक होती थी कि वे एक बार में पूरी पुस्तक पढ़ लेते थे। जब वे एकाग्रता की राह पर थे तो उन्होंने कहा था कि ‘‘अगर मेरा दोबारा जन्म हो तो मैं केवल एकाग्रता की शक्ति विकसित करूँगा।’’

महान् दार्शनिक गेटे भी कहते थे कि ‘‘दृढ़ प्रतिज्ञ व्यक्ति विश्व को अपने कदमों में झुका देता है।’’ जब व्यक्ति कार्य के प्रति एकाग्र हो जाता है तो वह मनोयोग के साथ उसे करता है। बच्चो, एकाग्रता के साथ काम करने से बहुत सारे लाभ होते हैं। यदि आप मन लगाकर पढ़ते हैं तो आप परीक्षा में अच्छे अंकों से पास होते हैं। किसी भी काम को एकाग्रता के साथ किया जाए तो उसमें असाधारण सफलता मिलती है। एकाग्रता के साथ काम करने से तनाव और बीमारी भी दूर रहते हैं, क्योंकि एकाग्र व्यक्ति अपने कार्य को पूरा करने में तन-मन से लगा रहता है। आप भी आज से ही एकाग्रता को अपनी आदत बना लीजिए और जीवन में सुंदर-सुंदर रंग बिखेरिए।