वाटरमैन सिमोन उराँव

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सिमोन उराँव ठेठ देशज आदमी हैं। गाँव के लोगों से जो सीखा, उसे समाज को दे दिया। केंद्र सरकार ने उन्हें 2016 में ‘पद्मश्री’ सम्मान से अलंकृत किया। सिमोन की खासियत ही कुछ ऐसी है कि राँची जिले के बेड़ो प्रखंड के दर्जनों गाँवों के लोग उनके मुरीद हैं। जनता का अथाह प्यार उन्हें मिला, आज भी मिल रहा है। ग्रामीणों के सहयोग से तीन-तीन बाँध, पाँच तालाब और कुओं की लंबी शृंखला खड़ी कर दी। महज साक्षर भर होकर उन्होंने जल प्रबंधन के क्षेत्र में जो कर दिखाया है, वह न सिर्फ बेड़ो, बल्कि पूरे राज्य और राष्ट्र के विकास के लिए एक सबक है। सिमोन ने लगभग चार किलोमीटर की परिधि में फैले वनक्षेत्र पर गाँव के ही लोगों का पहरा बैठा दिया, ताकि माफिया से वन एवं पर्यावरण की रक्षा हो सके।

सिमोन ने सन् 1955 से 1970 के बीच बाँध बनाने का अभियान जोरदार ढंग से चलाया। जब उन्होंने यह काम शुरू किया तो लगभग 500 लोग उनसे जुड़कर जल-संरक्षण की दिशा में काम करने लगे। 5,000 फीट नहर काटकर, 42 फीट ऊँचा बाँध बनाकर 50 एकड़ में सिंचाई की सुविधा की। उन्होंने भी यह महसूस किया कि बाँध बनाने से बहुत मदद मिल रही है। वे आज भी जल-संरक्षण, वन रक्षा और पर्यावरण-संरक्षण के लिए काम करते हैं। उन्होंने अनपढ़ होते हुए भी गाँव में आठवीं लास तक पढ़ाई शुरू कराने में सफलता पाई। सिमोन जमीन पर गाँववालों का अधिकार मानते हैं। उन्होंने तीर-धनुष लेकर पेड़ों की कटाई का विरोध किया। पर्यावरण संरक्षण के मकसद को पूरा करने के लिए वे दो बार जेल जा चुके हैं और दोनों बार अदालत ने उन्हें सामाजिक कार्यकर्ता बताकर रिहा कर दिया।

सिमोन ने पूर्वजों से मिले पारंपरिक ज्ञान को ग्रामीणों के बीच बाँटा, फिर मेहनत की बदौलत गाँव की तसवीर बदलने की समेकित योजना तैयार की। काम मुश्किल था, परंतु ग्रामीणों के सहयोग से मंजिल मिलती गई। लगभग दशक भर की कड़ी मेहनत के बाद पहले गायघाट, फिर झरिया और फिर देशपल्ली बाँध बनकर तैयार हो गया। ग्रामीणों के सहयोग से इस बाँध के सहारे 5,500 फीट लंबी नहर निकाली गई। ग्रामीणों में नई ऊर्जा का संचार हुआ। फिर वैसे क्षेत्र, जहाँ बाँध का पानी नहीं पहुँच सकता था, ग्रामीणों के सहयोग से 5 तालाब और 10 कुएँ खोद डाले गए।

वे एक बात का जिक्र करते हैं—‘देखो, सीखो, करो, खाओ और खिलाओ’। इस भावना के साथ अगर हम आगे बढ़ें तो गाँवों की तसवीर बदल जाए। जब ग्रामीण समृद्ध होंगे तो उनका आर्थिक व सामाजिक स्तर ऊँचा उठेगा।

सिमोन को पर्यावरण संरक्षण के लिए पहले भी कई पुरस्कार मिले हैं—

  1. उन्हें ‘अमेरिकन मेडल ऑफ ऑनर लिमिटेड स्टारकिंग-2002’ पुरस्कार के लिए चुना गया।
  2. विकास भारती विशुनपुर से ‘जल मित्र’ का सम्मान मिला।
  3. झारखंड सरकार की ओर से सम्मान।