मैं राँची हूँ

143 views

झारखंड की राजधानी राँची को ‘झरनों का शहर’ भी कहा जाता है। छोटा नागपुर पठार के दक्षिणी छोर पर बसा राँची झारखंड का दूसरा सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर है। समुद्र तल से 2,140 फीट की ऊँचाई पर स्थित राँची ऊँची-ऊँची इमारतों से घिरा है और चकाचौंध भरी जिंदगी जी रहा है। स्वर्णरेखा नदी के साथ-साथ यहाँ इसकी कुछ सहायक नदियाँ भी हैं। राँची में ढेरों झरने, चट्टान से बनी आकृतियाँ, पहाडि़याँ और कई औद्योगिक परिसर हैं। ब्रिटिश काल के समय तो राँची एक हिल स्टेशन हुआ करता था। पहले राँची जिले का नाम लोहरदगा था। सन् 1831-32 में कोल विद्रोह के समय पुराना जिला दक्षिण-पश्चिम सीमांत क्षेत्र होने के कारण अस्तित्व में आया। एक गाँव के नाम के आधार पर सन् 1899 में इसका नाम बदलकर ‘राँची’ रख दिया गया। जनसंख्या वृद्धि और औद्योगिकीकरण के कारण यहाँ के मौसम में तेजी से बदलाव आया और औसत तापमान में भी वृद्धि हुई। इससे धीरे-धीरे यह हिल स्टेशन नहीं रह गया। राँची में गरमी काफी पड़ती है, जबकि ठंड का मौसम काफी सुहाना होता है। दिसंबर व जनवरी का महीना सबसे ज्यादा ठंडा होता है और शहर के कुछ हिस्सों में तापमान शून्य डिग्री से. तक पहुँच जाता है। जून से सितंबर के बीच यहाँ बरसात का मौसम रहता है। इस दौरान यहाँ मुसलाधार वर्षा होती है।

 

राँची में स्थित दसम फॉल राँची-टाटा मार्ग पर तैमारा गाँव के पास है। यहाँ पर स्वर्णरेखा नदी की एक सहायक नदी काँची 144 फीट की ऊँचाई से गिरती है। इसी तरह हुँडरू फॉल राँची से 45 कि.मी. दूर राँची-पुरुलिया मार्ग पर स्थित है। यहाँ पर स्वर्णरेखा नदी 320 फीट की ऊँचाई से गिरती है। जोन्हा फॉल राँची से 40 कि.मी. दूर है। इसे ‘गौतमधारा’ नाम से भी जाना जाता है। बस और ट्रेन दोनों से यहाँ आसानी से पहुँचा जा सकता है। यहाँ एक टूरिस्ट रेस्ट हाउस भी है, जिसमें भगवान् बुद्ध का मंदिर है। काँची नदी पास से होकर ही गुजरती है। राँची के अन्य रोचक पर्यटन स्थलों में नक्षत्र वन, गोंडा और टैगोर हिल्स भी शामिल हैं।