मैं कोलकाता हूँ

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बच्चो, मैं कोलकाता हूँ। मैं हुगली नदी के बाएँ किनारे पर स्थित हूँ और पश्चिम बंगाल की राजधानी हूँ। मैं भारत का दूसरा सबसे बड़ा महानगर तथा पाँचवाँ सबसे बड़ा बंदरगाह हूँ। मैं अपने अंदर कई गाथाएँ समेटे हुए हूँ। मुझे भारत में शैक्षिक एवं सांस्कृतिक परिवर्तनों के लिए जाना जाता है। मुझे ‘पूर्वी भारत का प्रवेश द्वार’ भी कहा जाता है। मैं रेलमार्गों, वायुमार्गों तथा सड़क मार्गों के द्वारा देश के विभिन्न भागों से जुड़ा हुआ हूँ।  हुगली नदी के दोनों किनारों पर आपको भारत के अधिकांश प्रसिद्ध जूट के कारखाने देखने को मिलेंगे। यहाँ पर मोटरगाड़ी तैयार करने के कारखाने, सूती वस्त्र उद्योग, कागज उद्योग, जूते तैयार करने के कारखाने, हौजरी उद्योग एवं चाय विक्रय केंद्र आदि भी स्थित हैं।

अरविंद घोष, इंदिरा देवी चौधरानी, विपिन चंद्र पाल जैसे व्यक्तित्व मेरी धरती पर ही पले-बढ़े और देश को स्वतंत्र कराने में अपना अमूल्य योगदान दिया। रामकृष्ण परमहंस एवं स्वामी विवेकानंद से तो आप सभी बहुत अच्छी तरह परिचित होंगे। मेरी माटी में ही इन महान् आत्माओं का विकास हुआ। आप सभी ने रवींद्रनाथ टैगोर एवं बंकिमचंद्र चटर्जी का नाम अवश्य सुना होगा। रवींद्रनाथ टैगोर ने राष्ट्रीय गान की एवं बंकिमचंद्र चटर्जी ने राष्ट्रीय गीत की रचना की। इतना ही नहीं, रवींद्रनाथ टैगोर पहले भारतीय हैं, जिन्हें साहित्य में ‘नोबेल पुरस्कार’ प्राप्त हुआ।

मेरे यहाँ चावल, माछेर झोल, रॉसोगुल्ला और मिष्टि चाव से खाया जाता है। यहाँ बंगाली महिलाएँ सामान्यतः साड़ी पहनती हैं। साडि़यों में यहाँ की बंगाली सूती व रेशमी साडि़याँ विश्वप्रसिद्ध हैं। इन्हें ‘ताँत’ कहा जाता है। पुरुष मुख्यतःपैंट-शर्ट और कुरता-धोतीपहनतेहैं।यहाँसभीत्योहारोंकेसाथदुर्गा-पूजा का पर्व बेहद धूमधाम से मनाया जाता है।

अजायबघर, चिडि़याघर, बिरला तारामंडल, हावड़ा पुल, कालीघाट, फोर्ट विलियम, विक्टोरिया मेमोरियल, विज्ञान नगरी आदि देखकर आपको बहुत आनंद आएगा।