पूसी की शरारत

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पूसी बिल्ली नटखट थी। वह अपनी शरारतों से सबको हँसाती थी। टॉमी पिल्ला सेठ धनीराम के घर में रहता था। वह मांस और हड्डी खाता था। टॉमी स्वादिष्ट भोजन खा-खाकर मोटा हो गया था। वह पूसी को चिढ़ाता था कि मुझे तो घर बैठे ही स्वादिष्ट भोजन मिलता है और तुम तो घूम-घूमकर अपना पेट भरती हो। यह सुनकर पूसी बोली, ‘‘मैं बेशक घूम-घूमकर अपना पेट भरती हूँ, लेकिन मैं गुलाम नहीं हूँ। आजाद हूँ। जब मरजी जहाँ चाहे वहाँ घूम सकती हूँ।’’

यह सुनकर टॉमी बोला, ‘‘हम्म…ऐसी आजादी से तो गुलामी भली।’’

पूसी को उसकी बात बहुत बुरी लगी। वह वहाँ से चली गई।

एक दिन टॉमी पार्क में सेठ धनीराम के साथ आया। सेठ ने उसे बेंच पर बैठा दिया। पूसी बिल्ली पार्क के एक कोने में रहती थी। अब उसकी दो बिल्लियों चिंकी और मिंकी से दोस्ती हो गई थी। तीनों ही साथ रहती थीं। टॉमी को देखते ही पूसी चिंकी और मिंकी से बोली, ‘‘इस टॉमी को धनी सेठ के पास रहने का बहुत घमंड है। आज इसे मजा चखाएँगे और इसको नकली हड्डी खिलाएँगे।’’ यह सुनकर चिंकी बोली, ‘‘पर नकली हड्डी कहाँ से लाएँगे?’’ पूसी बोली, ‘‘इसकी चिंता मत करो, उसका इंतजाम मैंने कर लिया है। आज सुबह बच्चे खेल-खेल में प्लास्टिक का एक सफेद मुड़ा हुआ पाइप गिरा गए थे। वह पाइप बिल्कुल हड्डी जैसा लगता है। मैंने उस पाइप को सँभालकर रख लिया था।’’

यह कहकर पूसी ने उस पाइप को निकाला तो चिंकी और मिंकी दोनों हैरानी से बोलीं, ‘‘अरे हाँ, यह तो बिल्कुल असली हड्डी नजर आता है।’’ इसके बाद पूसी ने नजर बचाकर उस पाइप को टॉमी के पास गिरा दिया। टॉमी की नजर उस पर पड़ी। वह तेजी से उसकी ओर लपका। जैसे ही उसने पाइप को मुँह में लिया, उसके दाँत बजने लगे। उसने जल्दी से नकली हड्डी को फेंका और अपने दाँतों को मसलने लगा। ध्यान से देखने पर टॉमी समझ गया कि यह हड्डी नहीं बल्कि कुछ और है। सेठ टॉमी की यह हरकत देख रहा था। उसे बहुत गुस्सा आया। वह टॉमी को एक धौल जमाते हुए बोला, ‘‘टॉमी, तुमको मैं अच्छे-से-अच्छा खाना देता हूँ, लेकिन फिर भी तुम्हारी नीयत कूड़े-कबाड़ पर ही लगी रहती है। तुम नहीं सुधरोगे?’’ सेठ की चपत से टॉमी चुप होकर अपने आपको सहलाता रहा। उसने उदास नजरों से पूसी की ओर देखा। पूसी, चिंकी और मिंकी को अब उस पर दया आ गई। उन्होंने सेठ को काटने का नाटक किया। सेठ तीनों बिल्लियों के हमले से भाग खड़ा हुआ। अब टॉमी आजाद था। इसके बाद टॉमी, पूसी, चिंकी और मिंकी चारों दोस्त बन गए और आजादी के साथ मिलकर रहने लगे।