पर्यावरण प्रदूषण

51 views

पर्यावरण प्रदूषण का अर्थ होता है—पर्यावरण में विषैले तत्त्वों का फैल जाना। ऐसे तत्त्व मनुष्य, जीव-जंतु और पेड़-पौधों को नुकसान पहुँचाते हैं। पर्यावरण प्रदूषण कई तरह के होते हैं; जैसे—वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, ऊष्मीय प्रदूषण, मृदा प्रदूषण आदि।

पर्यावरण में प्रदूषण का मुख्य कारण है तेजी से वृक्षों की संख्या कम होना। जनसंख्या बढ़ने के साथ-साथ पृथ्वी पर रहने की जगह बनाने के लिए पेड़ों और जंगलों को काटा जा रहा है। इसी कारण सभी तरह के प्रदूषणों का जन्म होता है। जंगलों की कटाई के कारण पृथ्वी पर कई प्रकार की भयंकर गैसें उत्पन्न हो गई हैं, जो पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रही हैं।

बच्चो, हम सभी यह जानते हैं कि अभी तक केवल पृथ्वी ही एक ऐसा स्थान है, जहाँ पर रहने के लिए जल, वायु और आवश्यक तत्त्व हैं। ऐसे में यदि पृथ्वी पर हानिकारक गैसें फैलती जाएँगी और ये जल, हवा आदि को दूषित करेंगी तो पृथ्वी पर जीवन बहुत मुश्किल हो जाएगा।

प्रदूषण के कारण कई तरह की बीमारियाँ फैल जाती हैं, जैसे—टायफाइड, डायरिया, साँस से जुड़ी समस्याएँ, ब्लड प्रेशर और ध्वनि प्रदूषण से बहरा होना आदि। इन बीमारियों के कारण व्यक्ति को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए बीमारियों की रोकथाम के लिए भी यह जरूरी है कि पर्यावरण प्रदूषण को फैलने से रोका जाए।

पृथ्वी पर अनेक महत्त्वपूर्ण गैसों का मिश्रण है; जैसे ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड, ऑर्गन और भाप आदि। ये सभी गैसें मनुष्य, जीव-जंतुओं और पेड़ों के लिए बहुत जरूरी हैं। इसलिए इनका वातावरण में संतुलित होना बहुत जरूरी है। इनके असंतुलन से गड़बड़ हो जाएगी, इसलिए हम सभी को अपने पर्यावरण को दूषित होने से बचाना चाहिए। इसके लिए आप सभी अपने जन्मदिवस पर एक पेड़ लगा सकते हैं और उसकी देखभाल कर सकते हैं। जब आप अपने हाथों से एक नन्हा पौधा रोपेंगे तो उसका ध्यान बिल्कुल ऐसे रखेंगे जैसे कि आपके माता-पिता आपका रखते हैं। आपको ऐसा करने में  बहुत आनंद भी आएगा। आप उसे नियमित रूप से पानी देंगे। कुछ समय बाद वह पौधा बड़ा होकर पेड़ बन जाएगा और सभी को फल-फूल व छाया देगा।