‘पद्मश्री’ से सम्मानित श्री बलबीर दत्त एवं श्री मुकुंद नायक को सलाम

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झारखंड के रियल हीरो

बच्चो, इस बार झारखंड के दो व्यक्तियों श्री बलबीर दत्त एवं श्री मुकुंद नायक को ‘पद््मश्री’ सम्मान द्वारा सम्मानित किया गया है। इससे पूर्व झारखंड के केवल 7 व्यक्तियों को ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया है।

 

श्री बलबीर दत्त प्रसिद्ध पत्रकार हैं। उन्होंने राँची के सबसे पुराने दैनिक ‘राँची एक्सप्रेस’ के संस्थापक संपादक के रूप में लंबे समय तक संपादन किया। वे साप्ताहिक ‘जय मातृभूमि’ के प्रबंध संपादक और दैनिक ‘देशप्राण’ के संस्थापक संपादक रहे। उन्होंने अनेक पुस्तकें लिखी हैं। उनकी प्रसिद्ध पुस्तकें हैं—‘कहानी झारखंड आंदोलन की’, ‘इतिहास से साक्षात्कार’, ‘सफरनामा पाकिस्तान’ व ‘भारत विभाजन’ आदि। बच्चो, ‘राँची एक्सप्रेस’ के संस्थापक संपादक बलबीर दत्त को केंद्र सरकार ने ‘पद्मश्री’ से नवाज कर पत्रकारिता जगत् को सम्मान प्रदान किया है। वह झारखंड के पहले पत्रकार हैं, जिन्हें यह सम्मान मिला है। पाकिस्तान के रावलपिंडी निवासी बलबीर दत्त को झारखंड में पत्रकारिता का पुरोधा कहा जाता है। बलबीर दत्त ने अपने पत्रकारिता के जीवन में अनेक पत्रकारों को तराशा, उनकी कमियों को सुधारा और उन्हें मार्गदर्शन दिया। आज उनके अनेक शिष्य प्रसिद्ध समाचार-पत्रों के साथ जुड़े हुए हैं। बलबीर दत्त ने अनेक देशों की यात्राएँ भी की हैं। उन्होंने अपने जीवन में खट्टे-मीठे अनुभवों को भोगा है और डटकर उनका मुकाबला किया है। बलबीर दत्त को ‘पद्मश्री’ मिलने के बाद यह बात सही साबित होती है कि मेहनती व कर्मठ व्यक्ति अपनी हिम्मत से सबकुछ पा लेता है। ‘पद्मश्री’ के अलावा उन्हें झारखंड सरकार ने लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड, बापूराव लेले राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार, देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद पत्रकारिता शिखर सम्मान, झारखंड गौरव सम्मान, विश्वविद्यालय आगरा का हीरक सम्मान और अन्य कई सम्मान मिले हैं। श्री बलबीर दत्त झारखंड के रियल हीरो हैं।

 

बच्चो, सिमडेगा के बोकबा गाँव में जनमे श्री मुकुंद नायक ने बी.एस-सी. करने के बाद केमिकल एनालिस्ट के रूप में काम किया। इसके बाद वे सूचना एवं जन-संपर्क विभाग में ड्रामा विभाग में चले गए। उन्हें कला के प्रति बचपन से ही प्रेम था और बचपन से जिस तरफ व्यक्ति की रुचि हो जाती है, वह उसी काम में अधिक सफल होता है। इसी तरह मुकुंद ने अपने बचपन के लक्ष्य लोक-गायक तक पहुँचने के लिए नौकरी छोड़ दी। मुकुंद ने झारखंड के लोकगीत अखरा को घर-घर पहुँचाया। गीत-संगीत के अभ्यास के लिए श्री मुकुंद नायक ने कठोर मेहनत की। धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाने लगी और उन्हें विदेशों से भी आमंत्रण आने लगे। उन्होंने विदेशों में भी अपने कई कार्यक्रम दिए और अपनी एक अलग पहचान बनाई। उनकी पहचान को वास्तविक पहचान ‘पद्मश्री’ मिलने से हुई। अब झारखंड का बच्चा-बच्चा मुकुंद नायक को जानता है। मुकुंद नायक भी रियल हीरो हैं।