संदेश : डॉ. मनीष रंजन

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बच्चो! आप सभी की परीक्षाएँ लगभग समाप्त हो गई हैं। अब आप सभी थोड़ा मनमौजी हो गए होंगे, खेल में ज्यादा मन लगा रहे होंगे, आखिर परीक्षाओं का भूत जो उतर गया है। आप सभी हँसें-खेलें और कोशिश करें कि इनडोर गेम्स की जगह आउटडोर गेम्स खेलें। आउटडोर गेम्स व्यक्ति के तन-मन दोनों को स्वस्थ बनाते हैं। इतना ही नहीं, आउटडोर गेम्स में यदि आप मन लगाएँ तो आप में से कई बच्चे धोनी और असुंता लकड़ा की तरह उपलब्धि पा सकते हैं। आप लोग मोबाइल व टी.वी. का उपयोग कम-से-कम करें और कोशिश करें कि इन दोनों पर अपनी योग्यता को बढ़ानेवाले काम ही करें।

सर्दी जा चुकी है और फाल्गुन का मौसम दस्तक दे चुका है। फाल्गुन का मौसम बेहद लुभावना होता है। न ज्यादा ठंडा और न ही बेहद गरम। दिल को सुकून देनेवाला। आप सब बच्चे अपनेआप को फाल्गुन के मौसम में रंगकर अपने स्वभाव को विनम्र, नेक और प्रभावशाली बनाएँ।

पुस्तकें व पत्रिकाएँ पढ़ने से व्यक्तित्व में निखार आता है, ज्ञान में वृद्धि होती है और इसके साथ ही लेखन की भावना भी उत्पन्न होती है। इसलिए आप पुस्तकें व रंग-बिरंगी पत्रिकाएँ अवश्य पढ़ें। खाली समय में अपने माता-पिता व संबंधियों की मदद भी करें, अशक्त व निर्धन लोगों की भी आवश्यकतानुसार मदद करें। ऐसा करने से आपके अंदर सामुदायिक भावना का विकास होगा, जो आपके आनेवाले जीवन में बहुत लाभदायक होगा। बच्चो! एक-एक व्यक्ति से मिलकर समाज का निर्माण होता है और समाज का गठबंधन तब मजबूत होता है, जब बचपन से ही हर बच्चे में सामाजिक भावनाओं का विकास मजबूती से हो। अभी आपके पास पर्याप्त समय है अपने अंदर सामाजिक भावनाओं को विकसित करने का, आउटडोर गेम्स खेलने का और अच्छी-अच्छी पुस्तकें पढ़ने का। इस स्वर्णिम समय का सदुपयोग करें और अपने जीवन को सफल बनाएँ।

आप सभी को मेरी शुभकामनाएँ।

डॉ. मनीष रंजन (भा.प्र.से.)
राज्य परियोजना निदेशक, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान, झारखंड