संदेश : मान. श्रीमती नीरा यादव

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मुझे यह जानकर बहुत खुशी हुई कि परियोजना नन्हे विद्यार्थियों के लिए ‘पंख’ का प्रकाशन करने जा रही है।

 

प्रारंभ से ही बच्चों के हाथों में ऐसी पत्रिकाओं व पुस्तकों का होना बहुत जरूरी है, जो उनके अंदर उनकी समझ के अनुसार ज्ञान भर सकें। एक दार्शनिक का कहना है कि बच्चे की शिक्षा का समय उसके जन्म के बाद से ही प्रारंभ हो जाता है। पाँच वर्ष में तो बालक घर के परिवेश, संस्कार और संस्कृति में रच-बस जाता है। इसलिए यदि बालक का भविष्य सुदृढ़ चाहते हो तो उसकी भाषा, व्यवहार और कार्यकलाप पर बचपन से ही ध्यान देना प्रारंभ कर दो। ‘पंख’ ऐसी ही पत्रिका है, जो छह से चौदह वर्ष की आयु वर्ग के विद्यार्थियों को उनके परिवेश, संस्कार और संस्कृति से जोड़ती है।

 

‘पंख’ पत्रिका में सरल व रोचक भाषा में महत्त्वपूर्ण जानकारियों का समावेश है। पहेलियाँ हैं, छोटी-छोटी कविताएँ हैं, जो बच्चों को अपने से जोड़ती हैं और संस्कार व ज्ञान देती हैं।

 

मैं इस पत्रिका से जुड़े सभी लोगों को इस नेक प्रयास के लिए हार्दिक बधाई देती हूँ और इस पत्रिका व विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हूँ।

डॉ. नीरा यादव
मंत्री, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, झारखण्ड