झारखंड के महानायक : वीर बुधु भगत

190 views

शहीद बुधु भगत 1831-32 के कोल विद्रोह के महानायक थे। बुधु ने अंग्रेजी सेना के खिलाफ जोरदार लड़ाई लड़ी। बुधु भगत का जन्म राँची जिले के चान्हो प्रखंड में सिलागांई गाँव में 17 फरवरी, 1792 को एक उराँव आदिवासी परिवार में हुआ था। बुधु का आम लोगों पर जबरदस्त प्रभाव था। लोग उनके एक इशारे पर अपनी जान तक कुरबान कर देने के लिए सदा तत्पर रहते थे। शहीद बुधु भगत का सैनिक अड्डा चोगारी पहाड़ की चोटी पर घने जंगलों के बीच था। यहीं पर रणनीतियाँ बनती थीं। कहा जाता है कि उन्हें दैवीय शक्तियाँ प्राप्त थीं, जिसके प्रतीकस्वरूप एक कुल्हाड़ी सदा वह अपने साथ रखते थे। कोल आंदोलन के जननेता शहीद बुधु भगत ने अंग्रेजों के चाटुकार जमींदारों, दलालों के विरुद्ध भूमि, वन की सुरक्षा के लिए जंग छेड़ी थी। आंदोलन में भारी संख्या में अंग्रेजी सेना तथा आंदोलनकारी मारे गए थे। बुधु भी 13 फरवरी, 1832 को शहीद हो गए। उनकी कहानियाँ उन जंगलों में आज भी विचरण करती हैं।

13 फरवरी, 1832 को बुधु और उनके साथियों को कैप्टन इंपे ने सिलागांई गाँव में घेर लिया। बुधु आत्मसमर्पण करना चाहते थे, जिससे अंग्रेजों की ओर से हो रही अंधाधुंध गोलीबारी में निर्दोष ग्रामीण न मारे जाएँ। लेकिन बुधु के भक्तों ने वृत्ताकार घेरा बनाकर उन्हें घेर लिया। चेतावनी के बाद कैप्टन ने गोली चलाने का आदेश दे दिया। अंधाधुंध गोलियाँ चलने लगीं। बूढ़ों, बच्चों, महिलाओं और युवाओं के भीषण चीत्कार से इलाका काँप उठा। उस खूनी तांडव में करीब 300 ग्रामीण मारे गए। अन्याय के विरुद्ध जन विद्रोह को हथियार के बल पर जबरन खामोश कर दिया गया। बुधु भगत तथा उनके बेटे ‘हलधर’ और ‘गिरधर’ भी अंग्रेजों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए।