झारखंड के पर्यटन स्थल

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झारखंड नदियों, पहाड़ों और वनों का प्रदेश है। यहाँ कुछ दर्शनीय स्थल तो प्रकृति-प्रदत्त हैं; जैसे प्रपात, नदियाँ, पहाड़, झरने और कुछ मानव निर्मित, जैसे मंदिर, मसजिद, किला एवं गढ़। कुछ ऐतिहासिक धरोहर हैं तो कुछ आधुनिक काल में बने भवन। आज आप झारखंड के कुछ प्रमुख दर्शनीय स्थलों के बारे में जानेंगे।

राँची पहाड़ी—राँची पहाड़ी झारखंड की राजधानी राँची के अंतर्गत रातू रोड पर स्थित है। इसकी ऊँचाई समुद्र तल से 2,140 फीट है। पहाड़ी की ऊँचाई नीचे से ऊपर लगभग 61 फीट है। पहाड़ की चोटी पर एक शिव मंदिर भी है, जिससे इसका नाम ‘पहाड़ी मंदिर’ पड़ा है। इसकी चोटी पर चढ़कर देखने से संपूर्ण राँची का दृश्य अत्यंत मनोरम दिखाई पड़ता है।

टैगोर हिल—राँची में ही मोरहाबादी में स्थित छोटी, लेकिन एक तीखी सी पहाड़ी को ‘टैगोर हिल’ कहा जाता है। यह स्थान पूर्व में रवींद्रनाथ ठाकुर के परिवार से जुड़ा हुआ था। इस कारण इस पहाड़ी का नाम ‘टैगोर हिल’ पड़ा। समुद्र तल से इस पहाड़ी की ऊँचाई 2,128 फीट है। पहाड़ी चोटी पर एक छोटा चबूतरा भी है, जिस पर बैठकर राँची के दृश्यों को देखना एकांत में अद्भुत दिव्य अनुभूति कराता है।

जुबली पार्क—झारखंड की लौह नगरी टाटानगर, जिसे जमशेदपुर के नाम से भी जाना जाता है, में टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी द्वारा निर्मित यह पार्क शहर के सुंदरतम स्थलों में से एक है। इस पार्क का निर्माण पूरा होने में 20 वर्षों का समय लगा था। फूलों की क्यारियों से सजा विस्तृत खुला स्थान, मखमली घास एवं पेड़-पौधे तथा रंगीन फव्वारे इस पार्क की सुंदरता को और अधिक बढ़ा देते हैं। यहाँ ठहरने के लिए अच्छे निजी होटल भी हैं। इस पार्क में झाड़दार झुके हुए वृक्षों के झुरमुट के बीच एक सुंदर झील भी है, जिसमें नौका विहार का आनंद लिया जा सकता है।

डिमना लेक—यह लेक या झील जमशेदपुर से लगभग 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। झील का स्वच्छ पानी एवं आसपास के मनोरम दृश्य पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इस लेक में नौका-विहार करना आनंददायक अनुभव है।

पलामू किला—पलामू किला औरंगा नदी तट पर एक पहाड़ी के ऊपर अवस्थित है। इसका निर्माण चीरो राजा मेदिनी राय ने अपने पुत्र प्रभात राय के लिए कराया था। नागपुरी शैली में निर्मित इस किले का दरवाजा विशाल, भव्य एवं आकर्षक है। दरवाजे की ऊँचाई 40 फीट एवं चौड़ाई 15 फीट है।

जगन्नाथपुर मंदिर—राँची के जगन्नाथपुर में इस मंदिर की स्थापना सन् 1691 में ठाकुर एनीनाथ शाहदेव के द्वारा की गई थी। 100 फीट ऊँचा यह मंदिर 250 फीट ऊँची पहाड़ी पर बना है। मंदिर में जगन्नाथ, बलभद्र एवं सुभद्रा की मूर्तियाँ विराजमान हैं। रथयात्रा के समय यहाँ मेला लगता है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग आते हैं।