जल संरक्षण

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जल है तो कल है। जल बिन सब सून। जल बिन नहीं है जीवन। ये सारी बातें आप आए दिन सुनते हैं। आधुनिक समय में जल के बढ़ते उपयोग के कारण यदि जल संरक्षण पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया तो आनेवाले समय में जल संकट गहरा हो सकता है। यदि बच्चों को बचपन से ही घर एवं स्कूलों में जल के किफायती ढंग से उपयोग करने की आदत एवं संस्कार सिखाए जाएँ तो जल व्यर्थ न बहे। अभी भी आए दिन देखने को मिलता है कि टंकियाँ बह रही हैं, सार्वजनिक नल खुले पड़े हैं और हम आँखें मूँदकर चुप बैठे रहते हैं। जल हमारे जीवन का एक अनमोल उपहार है। धरती पर मनुष्य, जीव-जंतु, पेड़-पौधे, कीड़े-मकोड़े—सभी को जल की जरूरत पड़ती है। पृथ्वी पर जल का तीन-चौथाई हिस्सा पानी से घिरा हुआ है। लेकिन उसमें से स्वच्छ जल बहुत कम प्रतिशत है, अर्थात् वह जल, जो व्यक्ति अपने इस्तेमाल के लिए प्रयोग कर सकता है। जल को स्वच्छ रखना बहुत जरूरी है। औद्योगिक कचरे के कारण भी जल प्रदूषित होता जा रहा है। जल को बचाने के लिए सभी औद्योगिक क्षेत्रों, स्कूलों, अस्पतालों आदि में उचित जल-प्रबंधन की व्यवस्था बहुत जरूरी है। लोगों को बरसात के पानी को इकट्ठा करने का प्रयास करना चाहिए। छोटे या बड़े तालाब बनाकर बरसात के पानी को बेकार बहने से बचाया जा सकता है। आप सभी बच्चे यदि निम्नलिखित छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देंगे तो जल समस्या उत्पन्न नहीं होगी—

  1. जल का इस्तेमाल करने के बाद नल को ठीक से बंद करना चाहिए, ताकि जल व्यर्थ न बहे।
  2. अधिकतर पौधे वर्षा ऋतु में लगाने चाहिए, जिससे कि उन्हें प्राकृतिक रूप से जल मिलता रहे।
  3. हमें हाथ, फल, सब्जी आदि को नल से धोने के बजाय बरतन में पानी लेकर धोना चाहिए।
  4. खेती-बाड़ी के लिए ड्रिप सिंचाई का उपयोग करना चाहिए। इससे जल बरबाद नहीं होगा और फसलों को पूरा पानी भी मिलता रहेगा।
  5. बरसात के पानी को शौच, कपड़े धोने और पौधों को पानी देने के उद््देश्य से बचाना चाहिए।

हम सभी जल का प्रयोग बेहद सावधानी से करके जल संरक्षण में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।