इसरो को जानें

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बच्चो! जिस तरह नासा पूरे विश्व की अंतरिक्ष खोजों के लिए विख्यात है और यह संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार की शाखा है, उसी तरह इसरो भारत का राष्ट्रीय अंतरिक्ष संस्थान है। इसरो का पूरा नाम भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन है। इसका मुख्यालय बंगलौर (कर्नाटक) में है। इसरो में लगभग सत्रह हजार कर्मचारी एवं वैज्ञानिक कार्य करते हैं। इस संस्थान का मुख्य उद््देश्य भारत के लिए अंतरिक्ष संबंधी तकनीक उपलब्ध कराना है। इसरो में अंतरिक्ष से संबंधित अनेक कार्य किए जाते हैं, इनमें उपग्रहों, यानों और भू-प्रणालियों का विकास शामिल है। इसरो की स्थापना भारत के महान् वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई ने 1969 में की थी। इन्हें अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक भी कहा जाता है। इसरो की स्थापना के बाद से ही भारत अमेरिका, रूस, फ्रांस, जापान और चीन समेत दुनिया के उन देशों में शामिल हो गया है, जो अपनी धरती पर सेटैलाइट बनाने और उसे लाँच करने की क्षमता रखते हैं। वर्तमान समय में इसरो के निदेशक ए.एस. किरण कुमार हैं।

इसरो की स्थापना के बाद से भारत ने विज्ञान के क्षेत्र में दिन-प्रतिदिन प्रगति की है। इसरो ने भारत के साथ-साथ अन्य कई देशों के लिए भी बहुत सारी सेटैलाइट्स लाँच की हैं। क्या आप जानते हैं कि आर्यभट्ट इसरो का पहला उपग्रह है, जिसे 19 अप्रैल, 1975 को रूस की सहायता से लाँच किया गया था। इस उपग्रह का नाम भारत के महान् गणितज्ञ आर्यभट्ट के नाम पर रखा गया था। इसके बाद 1980 में रोहिणी उपग्रह भारत के द्वारा बनाया गया पहला प्रक्षेपण यान एसएसलवी-3 बन गया, जिसे कक्षा में स्थापित किया गया। इसरो ने बाद में दो रॉकेट भी विकसित किए। इसरो का हिस्सा बननेवाले वैज्ञानिक एवं कर्मचारी बेहद प्रतिभाशाली होते हैं। दरअसल, विज्ञान में रुचि रखनेवाले व्यक्ति ही विज्ञान के प्रति नई-नई खोजों में तन-मन से कार्य कर पाते हैं।

अभी हाल ही में फरवरी 2017 में इसरो ने श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से पी.एस.एल.वी. के जरिए एक साथ 104 सेटैलाइट्स का प्रक्षेपण कर विश्व रिकॉर्ड बनाया। पहले यह विश्व रिकॉर्ड रूस के नाम था। रूस ने वर्ष 2014 में एक साथ 37 सेटैलाइट्स भेजे थे।

इसरो ने भारत को डॉ. विक्रम साराभाई, श्री सतीश धवन, जी माधवन नैयर, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे महान् वैज्ञानिक दिए हैं। इसरो को शांति, निशस्त्रीकरण और विकास के लिए साल 2014 के ‘इंदिरा गांधी पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है। जून 2016 तक इसरो कई देशों के 57 उपग्रहों को लाँच कर चुका है और अब इसकी ख्याति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है। बच्चो! यदि विज्ञान में तुम्हारी रुचि है, तो वैज्ञानिक बनने के बाद आप इसरो में कार्य करने के सपने को सच कर सकते हैं।