आर्यभट्ट

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जानिए महान् वैज्ञानिक और गणितज्ञ को

आर्यभट्ट का जन्म बिहार के वर्तमान पटना के कुसुमपुर में 476 ई. में हुआ था। गणित और विज्ञान के क्षेत्र में किए गए उनके अनूठे काम आज भी सबको प्रेरणा देते हैं। सभी बच्चों को कविताएँ पसंद हैं। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि आर्यभट्ट ने अपनी प्रसिद्ध रचना ‘आर्यभटीयम्’ को कविता के रूप में लिखा। बच्चो, कविता के रूप में लिखी गई ‘आर्यभटीयम्’ गणित की एक बहुत चर्चित पुस्तक है। इस पुस्तक में आर्यभट्ट ने खगोलशास्त्र और गोलीय त्रिकोणमिति के बारे में बताया है। इसके साथ ही इसमें अंकगणित, बीजगणित और त्रिकोणमिति के 33 नियम भी दिए गए हैं। गणित के इस महत्त्वपूर्ण ग्रंथ में वर्गमूल, घनमूल, समानांतर श्रेणी तथा भिन्न प्रकार के समीकरण के बारे में बताया गया है।

 

बच्चो, तुम सब यह जानते हो कि पृथ्वी गोल है और अपनी धुरी पर घूमती है। इसीलिए दिन-रात होते हैं। आर्यभट्ट ने निकोलस कॉपरनिकस नामक वैज्ञानिक से भी एक हजार साल पहले इस बात की खोज कर ली थी कि पृथ्वी गोल है। कुसुमपुर के इस महान् वैज्ञानिक और गणितज्ञ ने अपने सूत्रों से इस बात को भी सिद्ध कर दिया था कि एक साल में 366 दिन नहीं, बल्कि 365.2951 दिन होते हैं।

 

उनकी अन्य पुस्तकें हैं—‘दशगीतिका’ और ‘तंत्र’।

 

बहुत हैरानी की बात है न कि पुराने समय में साधनों के बिना उन्होंने ज्योतिष-शास्त्र और गणित के सूत्रों की खोज की। गणित एक बेहद रोचक विषय है। यदि आप भी गणित के साथ मन लगाएँगे तो गणित आपको डराएगा नहीं, बल्कि आर्यभट्ट की तरह रोचक लगेगा और क्या पता, आप में से कोई बच्चा भविष्य का आर्यभट्ट बन जाए। तो चलिए, आर्यभट्ट की तरह आप भी गणित में रुचि लीजिए और अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाइए।