संदेश : श्रीमती आराधना पटनायक

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मुझे यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि बाल पाठकों के लिए एक सरल व रंग-बिरंगी हिंदी पत्रिका ‘पंख’ प्रकाशित की जा रही है।

 

आजकल बहुत कम उम्र में ही बच्चों के हाथों में पत्रिकाएँ आ जाती हैं। इसलिए पत्रिकाओं का स्तर ऐसा होना चाहिए, जो बच्चों के हृदय को छू सके और उनकी जिज्ञासा को शांत कर सके। इस दृष्टि से ‘पंख’ ऐसी ही पत्रिका है। इस पत्रिका में चित्रात्मक भाषा और कथ्य का प्रयोग किया गया है। बहुत ही आसान भाषा में बच्चों को वह तमाम जानकारियाँ देने का प्रयत्न किया गया है, जो उनके लिए जानना बहुत जरूरी है। बच्चों को पत्रिकाओं व पुस्तकों के प्रति आकर्षित करना भी एक कला है और इस कला में वही खरा उतरता है, जो बच्चों के हृदय तक पहुँच पाने में सफल होता है। बच्चे कोमल स्वभाव के और भोले होते हैं। उनका मन गीली मिट्टी की तरह होता है। ऐसे में उन्हें एक सही साँचे में ढालना बहुत जरूरी है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि ‘पंख’ पत्रिका देश व राज्य के हर बच्चे को एक सही और मजबूत साँचे में ढालने में कामयाब होगी।

 

इस पत्रिका को पढ़कर बच्चों का ज्ञानवर्द्धन तो होगा ही, साथ ही उन्हें भरपूर मनोरंजन भी मिलेगा।

 

मैं इस पत्रिका के प्रकाशन से जुड़ी पूरी टीम को हार्दिक शुभकामनाएँ देती हूँ।

आराधना पटनायक (भा.प्र.से.)
सचिव, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, झारखण्ड