अद्भुत जीव है साँप

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बच्चो, साँप को देखते ही डर लगता है न! आज हम आपको साँप के बारे में बहुत महत्त्वपूर्ण बातें बताएँगे। साँप छिपकलियों के निकट संबंधी होते हैं, लेकिन इनकी आकृति भिन्न होती है। साँपों का सबसे बड़ा भेद यह है कि उनके पैर नहीं होते। बिना पैरों के फिर साँप कैसे चलते हैं? बल्कि जमीन पर बहुत तेजी से भागते हैं। साँपों के निचले भाग पर जो सेहर होते हैं, उनके दोनों सिरे उनकी पसलियों से जुड़े रहते हैं। जब साँप को चलना होता है तो वह अपनी पसलियों को चलाता है और उससे जुड़े हुए सेहर उसे आगे खिसका देते हैं। साँप सीधे न चलकर लहराता हुआ चलता है। साँप सुनते भी बहुत अनोखे ढंग से हैं, क्योंकि साँप के कान के छिद्र नहीं होते और कानों से उन्हें सुनाई भी नहीं देता। फिर वे सुनते कैसे हैं? है न यह भी हैरानीवाली बात! सुनने के लिए साँपों को प्रकृति ने उनकी त्वचा में एक अद्भुत शक्ति दे रखी है। उसी शक्ति के माध्यम से वे दूर की आहट को भी अपने सारे शरीर से ग्रहण कर लेते हैं। पचास-साठ मीटर की दूरी पर भी यदि किसी चीज से ठोका जाए या कोई आवाज की जाए तो उसकी जानकारी साँप को हो जाती है। साँप की जीभ लंबी और दोफाँकी होती है। आप में से कई लोगों ने देखा होगा कि साँप अपनी जीभ थोड़ी-थोड़ी देर में बाहर निकालते रहते हैं। उनकी लपलपाती जीभ देखकर डर लगता है न! उनके मुँह के दोनों जबड़ों की बनावट भी अनोखी होती है। वे उन्हें फैलाकर अपने मुँह को काफी चौड़ा कर सकते हैं। इसलिए अजगर आदि साँप, जिनका मुँह देखने में छोटा लगता है, पर वे भेड़, बकरी, हिरण और सुअर को पूरा निगल जाते हैं। साँप के फन के बारे में भी आपने सुना होगा। पर सभी साँप फनवाले नहीं होते। फन तो केवल नाग और नागराज के ही होते हैं। साँप अपने शरीर की खाल या केंचुल को पुरानी होने पर बदल लेते हैं। केंचुल को उतारने के लिए साँप किसी खुरदरी वस्तु से स्वयं को रगड़ते हैं, इसलिए उनकी केंचुल उतर जाती है। साँप मांसाहारी होते हैं और वे छोटे-मोटे जीव-जंतु जैसे मेढक, मछलियाँ, चिडि़या और अंडों को पूरा ही निगल जाते हैं। साँपों के दाँत भीतर की ओर मुड़े हुए रहते हैं। इससे उन्हें अपने भोजन को अंदर सरकाने में आसानी रहती है, लेकिन साथ ही कठिनाई यह होेती है कि फिर वे आधा निगला हुआ भोजन बाहर नहीं निकाल सकते। साँप अंडे देते हैं और हैरानी की बात है कि वे अकसर अपने अंडे देकर फिर उनकी खोज-खबर नहीं लेते। लेकिन सभी साँप ऐसा नहीं करते, कुछ अपने अंडों को सेते भी हैं। साँप जमीन के साथ-साथ जल में भी पाए जाते हैं। साँप मनुष्यों के दुश्मन माने जाते हैं, क्योंकि वे मनुष्य को डसकर उन्हें मौत के मुँह में धकेल देते हैं। लेकिन साँप मनुष्य के शत्रु होने के साथ-साथ मित्र भी हैं, क्योंकि जीव-जंतुओं को खाकर वे पर्यावरण को स्वच्छ रखते हैं। सभी साँप विषैले नहीं होते।

देखा, आज आपको साँप के बारे में अनेक महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ पता चल गईं। अब आप अपने मित्रों को भी ये जानकारियाँ अवश्य देना।